कविता - कान्हा की प्रेम, प्रेरणा

प्रेम मूल्य मंत्र है, मत इसे खोना
क्रोध, शत्रुता का नाश कर प्रेम का बीज बोना।

त्याग समर्पण की भावना से, प्रेम का भाव जगाना।
अपने मन कान्हा में लगाके, हृदय से प्रेम लगाना।

सच्ची खुशी का अनुभव मन शांत लगेगा।
प्रेम का बंधन कान्हा से बंधेगा।

जिससे कोई तोड़ नहीं सकेगा।
जब ध्यान चित्त कान्हा से लगेगा।

सच्ची प्रेम की अमर कहानी
जिसमे राधा,मीरा गोपियां हुईं थीं
कान्हा की दीवानी।

एक - दूजे से बिछड़ कर भी मनमोहन श्याम जपती रही।
दिन बीता जाए पवन से संदेशा  भेजती रही।

सोचती एक दिन तो मोहन आएगा ।
हमे अपनी छवि का दर्शन कराएगा।
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