Moral stories (in hindi)रिश्तों की दरार


रिश्तों की दरार


यह moral stories कहानी है। कवित्री प्रेमलता ब्लॉग एक कविता का ब्लॉग है जिसमे कविता, शायरी, poem, study guide से संबंधित पोस्ट मिलेंगे


Step-1.

  एक शहर में एक बड़ा परिवार रहता था जो हमेशा अत्यंत सुखमय एवं  अपने जीवन को निस्वार्थ रूप से परिपूर्ण कर रहे थे। उन लोग अत्यंत खुशनुमा जिंदगी जीवन यापन कर रहे थे ।वह हमेशा  एक दूसरे का मदद करते और एक दूसरे के लिए जीते मरते थे । उन लोगों के मन में किसी भी प्रकार की द्वेष की भावना नहीं थी। वह परिवार अत्यंत सुखमय था।उन लोगों के परिवार में केवल छ: सदस्य थे जिसमें से दो बुजुर्ग थे ।

 दादा-दादी के बेटा बहू का नाम नारायण और लक्ष्मी था ।और उसके पुत्र थे जिसका  नाम त्रिलोचन था। वह लोग हमेशा एक दूसरे से  शांति  जिंदगी यापन कर रहे थे और नारायण की एक बहन थी जिसका नाम आरती था।वह  बहुत ही सुशील एवं बुद्धि मती थी।त्रिलोचन शादी होने के लायक हो गया था। तो उसके घर वाले लक्ष्मी और नारायण परेशान भी व लड़की देखने के लिए उत्सुक हो गए थे ।उन लोग अपने पुत्र के लिए एक सुशील सुबुद्धि वाली लड़की की तलाश में थे।

Step-2.

 उन लोगों को एक दिन पता चला कि उसके गांव के पास में ही एक बहुत ही अच्छी लड़की रहती है। और उसके माता-पिता भी अच्छे हैं ।उन लोग हमेशा सादा जिंदगी जीवन यापन करते हैं। तो उसके घर में अपने प्रथम पुत्र के लिए लड़की मांगने के लिए गए तो उस लड़की का नाम स्वरूपा थी। स्वरूपा के माता-पिता भी त्रिलोचन को पसंद कर लिए।

 और स्वरूपा का शादी मस्त धूमधाम से हुआ और त्रिलोचन व स्वरूपा  सुख में जीवन  यापन करने लगे।।

Step-3.

रिश्तों की दरार एक moral stories है। कवित्री प्रेमलता ब्लॉग एक कविता का ब्लॉग है जिसमे कविता, शायरी, poem, study guide से संबंधित पोस्ट मिलेंगे

 तो यह सब देख कर उसके पड़ोसी वाले बहुत ही जलन फील करते थे ।उन लोग नहीं चाहते थे, कि इन लोग खुश रहे। उन लोग देखते कि यह लोग हमेशा खुश हैं तो इसके लिए कुछ ना कुछ लड़ाई भी सुनाई देती तो कुछ  मजा आ जाए। यह सोचकर  पड़ोसी लोग षड्यंत्र रचने लगे।  कि इन लोगों हम लोग जैसे लड़ाई क्यों नहीं होते हैं, वैसे ही इन लोगों के भी घर में लड़ाई होना चाहिए ।तो एक बार क्या हुआ कि पड़ोसी जो थी ।वह त्रिलोचन की पत्नी स्वरूपा को भड़काने लगी। तेरी सासू मां बहुत बुरी है ।तेरी ससुर अच्छे इंसान नहीं है। इस तरह उन लोगों को तरह-तरह की बातें बना- बना कर स्वरूपा की कान भरने लगी। लेकिन स्वरूपा उन लोगों की बातों में ध्यान नहीं देती ।

Step-4.

वह अपने काम में मगन हो जाती थी। लेकिन पड़ोसी भी हार नहीं माने उन लोग रोज आ -आ कर घर में स्वरूपा को इतना भड़का दिए कि उसके अपने ही सास ससुर के प्रति दुश्मन की भावना पैदा कर दिए। तो अब स्वरूपा सोचने लगी । कि मेरे सास-ससुर  मुझसे ज्यादा काम करवाते हैं ।

अपने बेटी बेटा को ज्यादा पसंद करते। उसके मन में द्वेष भाव उत्पन्न हो गए। इसी तरह से आरती की भी  शादी होने को आई।उसके लिए वर चुना गया ।और उसका भी शादी करके भेज दिया गया ।तो क्या हुआ कि उसके आरती के उसके ससुराल में अच्छे से नहीं बनी, तो वह मायके में आकर बैठ गई।

तो  स्वरूपा कुछ  दिन तो आरती को कुछ नहीं बोली।

Step-5.

  बहुत अच्छा व्यवहार की ।फिर उसके बाद में उसके प्रति जलन की भावना आने लगी। कि यह मेरे घर में क्यों है कुछ काम करती नहीं है ।ऐसे करते - करते  उसके  मन दूषित हो गया। और पड़ोसी लोग मजा लेने लगे। इस तरह से पड़ोसी लोग मजा उठाने लगे ।तो त्रिलोचन यह सब बात को बाहर से पता चल गया कि पड़ोसी हम लोगों के रिश्ते में दरार उत्पन्न कर रहे हैं ।

 हम लोगों को शांति से जीवन यापन करते देखे हम लोगों के प्रति  जलन की भावना आ गई है। तब स्वरूपा को एक  दिन त्रिलोचन बैठा कर कहा। तथा स्वरूपा को सुंदर से समझाने लगा। कि यह पड़ोसी हैं हम लोगों के प्रति जलन पैदा कर रही है। 

और हम लोगों की रिश्ते में फुट कर रही हैं।

Step-6.

 अगर विश्वास नहीं आ रहे तो एक बार हम लोग इन लोगों का परीक्षा कर ले कर देखते हैं। तो जब पड़ोसी बात कर रहे थे तो त्रिलोचन स्वरूपा को लेकर चुपके से दरवाजे के पीछे सिमटकर उन लोगों के बातों को सुनने लगे। जिसमें एक पड़ोसन बोली थी। कि हां यहां बहुत मजा आया नारायण के घर फूट रहे हैं । हम लोगों की बात में आकर अपने घर वाले को तंग कर रही है। दूसरी बोली हां यार बहुत मजा आया लोगों की जिंदगी में अब उन लोग भी हमारे जैसे ही लड़ाई होगा। देखने में मजा आएगा।

 ऐसे ही बात कर रहे थे तो समझ गए कि आखिर पड़ोसी लोगों को चोरी चुगली और पड़ोसन की लड़ाई झगड़ा देखने में बहुत मजा आता है ।कभी भी अपने घर वाले को ग़लत न समझे। और शांति नुमा जिंदगी यापन करने लगी। और लक्ष्मी नारायण के नारायण के बहन आरती को भी मना कर उसके ससुराल में भेज दिए गए। और फिर से उस के परिवार वही खुशहाली जिंदगी आ गई।

Moral stories (in hindi)अमीरी का घमंड

अमीरी का घमंड


मेहनत से ही रोटी मिलती है।


विषय - पैसों का महत्व। 

व्याख्या -।         1step

एक शहर में राजू नाम का एक लड़का था। वह अमीर बाप का इकलौता बेटा था। राजू  का पालन - पोषण इतने अच्छे से हुआ था कि वह बड़ों का आदर एवम् छोटे का सम्मान करना भूल गया था। राजू को न कभी दुख का एहसास था नहीं ही उसे पैसों का महत्व समझ आता। वह इतना बिगड़ गया था कि अपने पापा के पैसों का सही उपयोग करना भूल गया था।उसके पापा रामनारायण हमेशा परेशान थे।वह सोचता कि मेरा बेटा कुछ करता तो मेरा नाम रोशन होता।लेकिन रामनारायण का सोचना सपनों के जैसा हो गया था। एक दिन की बात है रामू अपने जन्मदिन के दिन अपने दोस्तों के साथ घूमने चला गया। जहां उन लोग गया वहां दूर - दूर से जंगल ही नजर आ रही थी।चारों तरफ हरियाली का माहौल था।फूलों की खुशबू जंगल को और मनोरमा बना रहे थे। रामू और उसके दोस्त इतना खो गए कि उसे समय का पता ही नहीं चला।    

           2nd step


शाम होने लगी चिड़ियां भी अपनी घोसला ढूंढने लगी । सूर्यास्त होने लगी थी। रामू और उसके दोस्त चलते - चलते जंगल के बहुत अंदर चले गए थे।वे रास्ता भटक गए थे। इधर - उधर भौचक्का सभी लोग  रास्ता ढूंढने में लग गए थे। कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिर रास्ता जो भटक गए थे। फिर थक हार कर एक दूसरे से बात करके अपने राशन का इंतजाम करने लगे। 

उसी जंगल के किनारे एक गांव था जिसमें हसरत नाम का राजा रहता था। जो अत्यंत प्रशंसनीय एवं  चतुर दिमाग वाला  था ।और वह हमेशा दूसरों के प्रति सदभाव एवं मददगार राजा था ।वह अपने प्रजा के हित के लिए सब कुछ करता था।वही पर कुछ लुटेरे  राजा के खजाने में से कुछ हीरे - जवाहरात को चुरा लिए और वही जंगल में आकर जो राजू के दोस्त थे वहीं पर आकर एक दूसरे से डिस्कस करके वहीं पर बांटने लगे राजा के सिपाही आते देख  डाकू  वहां से भाग गए तथा राजा के सैनिक  राजू और उसके दोस्तों को देख उन्हीं लोगों को डाकू समझ पकड़ लिया। और  राजा को के पास ले गया।


              3step

राजा, राजू और उसके दोस्त को देख सजा सुनाने की ठानी।लेकिन राजू को कुछ समझ नहीं आ रहा था वह क्या करे सब यही बोल रहे थे कि हम चोर नहीं है पर यकीन किसी ने नहीं किया। राजा वे सब को मजदूर का काम कराने लगे।वे सब को अलग - अलग काम दिया गया था। शुरू में तो राजू आलसी जैसा काम करने लगा।तो सजा में खाना कम देते।यह देख राजू पूरी लगना मेहनत से काम करने लगा ।और उसे अच्छे से खाना भी मिलने लगी। तथा उसे ज्यादा काम करता तो उसे काम के बदले में दो-चार पैसे भी मिल जाते। अब धीरे - धीरे रामू को मजदूरों की हालत देख रोटी की कीमत जानने लगा। वह सोचने लगा कि दो लिवाला रोटी के लिए मजदूर दिन रात मेहनत करते है। एक दिन रामू बगीचे में  पानी दे रहा था।वहां पर राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ बाग बगीचों के फूलों का आनंद उठा रही  थी। उस देख देखकर फूलों की क्यारियों की तारीफ करने लगी । कि मनोरमा फूलों की खुशबू है कितना सुंदर है यह मौसम नजारा है।

                  4 step

 वहीं पर राजू की नजर राजकुमारी पड़ जाती है तो वह मंत्रमुग्ध हो जाता है क्योंकि राजकुमारी थी रेशमी बाल थे सुंदर शुशील थी। राजकुमारी भी राजू को देखी। कुछ समय बाद एक दूसरे का पहचान हो गई कुछ दिनों में अच्छे दोस्त बन गए।इधर राजू के पापा को उसके उपर पहाड़ टूट पड़ी थी वहां हमेशा चिंता हरा शिवम अपने पुत्र को खोजने के लिए सभी जगह हर तरह के प्रयास करते एक दिन उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना उसके दोस्तों से के माता पिता के पास जाकर पूछ लिया जाए तो वह वहां गए तो पता चला कि पिकनिक में गए फिर वापिस नहीं आए। 

 फिर नारायण जंगल जाने के लिए जरा सा भी देर नहीं किए उसी रास्ता में जाते जाते राजा के महल पहुंच गए तो गांव वालों से पता चला कि यहां पर कुछ लड़के कुछ ही दिनों में आए हैं। जो चोरी के नाम से पकड़ा गए हैं।

                      5step

रामनारायण राजा के पास सिपाहियों के साथ गए । राजू वहीं पर साफ - सफाई का काम कर रहा था। वह अपने पिता को देख तुरंत उसको पहचान लिया और उसके पास जाकर पूरी अपनी कहानी बताई। तो राजा ने कहा कि चलो इस पर हम एक बार फिर से विचार करते हैं तो देखा कि वहां जाकर उसी  जंगल में जिस जगह रामू डाकुओं को देखा था जहां डाकू खजाने को बांट रहे थे वहीं पर छानबीन करने पर उसे जो खाजाना जो आम के वृक्ष के नीचे दबाए हुए थे वह मिल गया । और राजू को रिहा कर दिया। और यह बिना गलती के जो उसको सजा मिली थी उसके बदले में राजू को कुछ मांगने के लिए कहा। तो राजू ने झिझकते दिल से तुरंत उसकी राजकुमारी की हाथ मांग ली। राजा पहले सोचा मगर रामू की आदत को इतना दिन में उसे पूरी तरह से समझ लिया था। तो फिर क्या था।

पैसों का महत्व

  राजकुमारी और राजू का धूमधाम से विवाह कर दिया गया।

 फिर राजू अपने शहर में वापस आ गया ।तथा अपने पिता का भी महत्व समझ गया, कि मेरे पिता मेरे लिए अपनी जिंदगी मेहनत करके मेरा पालन - पोषण किया है। और धूमधाम से अपनी जिंदगी का जीवन यापन करने लगा।