कविता - होली

                                होली

होली त्यौहार की चित्रत्मक  कवित्री प्रेमलता ब्लॉग एक कविता का ब्लॉग है जिसमे कविता, शायरी, poem, study guide से संबंधित पोस्ट मिलेंगे  रूपा,इंसाफ


  • रंगो की बहार में, खुशियों की बरसात लेके आई होली।
  • रंग बिरंगे फूलों कि क्यारियां लेके आई होली।

  • मस्ती में सब रंग लगाएं।
  • पिचकारी की डर से चले बच बचाएं।

  • नीली, पीली, लाल, गुलाबी, हरा रंग हरियाली बिछाती।
  • मौसम भी सजे रंगीन वस्त्रों से, बादल खुशहाली बिछाती। 

  • प्रकृति की झकझोर ने ली रंग बसंती पवन ले उड़ाई।
  • बादलों की टोली धूम मचाती लता ने सखी बुलाई।

  • बच्चे भी दौड़ते - दौड़ते पिचकारी ले एक दूसरे में पिचकते।
  • जो बच्चे इसमें हारे ओ रो पड़े सिसकते।

  • गुब्बारा में भरी रंग पत्थर की तरह मारे।
  • एक दूसरे एकता हो दूसरे टोली को पिचकारी मारते चले सारे।

  • सूरज ने कहां नहाने का अब समय हो चला।
  • सबने सोचा पिचकारी का समय अब टला।

  • नहाकर नए नए कपड़े पहन एक दूजे के घर में रोटी बनाते।
  • अरसा, पूड़ी, हलवा एक दूसरे को के खिलाते।

  • आनंद में मन झूम जाता ।
  • कोयल भी मीठी धुन सुनाता।

  • वसुंधरा की सज गई रंग बिरंगे साड़ियां।
  • फूलों की बाग जैसी सज गई रंग बिरंगे गांव की नारियां।

  • मन हर्षित उल्लास से मंत्रमुग्ध है।
  • छुआ छूत की भावना दूर एकता में शुद्ध है।
happy Holi


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