Moral stories (in hindi)अमीरी का घमंड

अमीरी का घमंड


मेहनत से ही रोटी मिलती है।


विषय - पैसों का महत्व। 

व्याख्या -।         1step

एक शहर में राजू नाम का एक लड़का था। वह अमीर बाप का इकलौता बेटा था। राजू  का पालन - पोषण इतने अच्छे से हुआ था कि वह बड़ों का आदर एवम् छोटे का सम्मान करना भूल गया था। राजू को न कभी दुख का एहसास था नहीं ही उसे पैसों का महत्व समझ आता। वह इतना बिगड़ गया था कि अपने पापा के पैसों का सही उपयोग करना भूल गया था।उसके पापा रामनारायण हमेशा परेशान थे।वह सोचता कि मेरा बेटा कुछ करता तो मेरा नाम रोशन होता।लेकिन रामनारायण का सोचना सपनों के जैसा हो गया था। एक दिन की बात है रामू अपने जन्मदिन के दिन अपने दोस्तों के साथ घूमने चला गया। जहां उन लोग गया वहां दूर - दूर से जंगल ही नजर आ रही थी।चारों तरफ हरियाली का माहौल था।फूलों की खुशबू जंगल को और मनोरमा बना रहे थे। रामू और उसके दोस्त इतना खो गए कि उसे समय का पता ही नहीं चला।    

           2nd step


शाम होने लगी चिड़ियां भी अपनी घोसला ढूंढने लगी । सूर्यास्त होने लगी थी। रामू और उसके दोस्त चलते - चलते जंगल के बहुत अंदर चले गए थे।वे रास्ता भटक गए थे। इधर - उधर भौचक्का सभी लोग  रास्ता ढूंढने में लग गए थे। कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिर रास्ता जो भटक गए थे। फिर थक हार कर एक दूसरे से बात करके अपने राशन का इंतजाम करने लगे। 

उसी जंगल के किनारे एक गांव था जिसमें हसरत नाम का राजा रहता था। जो अत्यंत प्रशंसनीय एवं  चतुर दिमाग वाला  था ।और वह हमेशा दूसरों के प्रति सदभाव एवं मददगार राजा था ।वह अपने प्रजा के हित के लिए सब कुछ करता था।वही पर कुछ लुटेरे  राजा के खजाने में से कुछ हीरे - जवाहरात को चुरा लिए और वही जंगल में आकर जो राजू के दोस्त थे वहीं पर आकर एक दूसरे से डिस्कस करके वहीं पर बांटने लगे राजा के सिपाही आते देख  डाकू  वहां से भाग गए तथा राजा के सैनिक  राजू और उसके दोस्तों को देख उन्हीं लोगों को डाकू समझ पकड़ लिया। और  राजा को के पास ले गया।


              3step

राजा, राजू और उसके दोस्त को देख सजा सुनाने की ठानी।लेकिन राजू को कुछ समझ नहीं आ रहा था वह क्या करे सब यही बोल रहे थे कि हम चोर नहीं है पर यकीन किसी ने नहीं किया। राजा वे सब को मजदूर का काम कराने लगे।वे सब को अलग - अलग काम दिया गया था। शुरू में तो राजू आलसी जैसा काम करने लगा।तो सजा में खाना कम देते।यह देख राजू पूरी लगना मेहनत से काम करने लगा ।और उसे अच्छे से खाना भी मिलने लगी। तथा उसे ज्यादा काम करता तो उसे काम के बदले में दो-चार पैसे भी मिल जाते। अब धीरे - धीरे रामू को मजदूरों की हालत देख रोटी की कीमत जानने लगा। वह सोचने लगा कि दो लिवाला रोटी के लिए मजदूर दिन रात मेहनत करते है। एक दिन रामू बगीचे में  पानी दे रहा था।वहां पर राजकुमारी अपनी सहेलियों के साथ बाग बगीचों के फूलों का आनंद उठा रही  थी। उस देख देखकर फूलों की क्यारियों की तारीफ करने लगी । कि मनोरमा फूलों की खुशबू है कितना सुंदर है यह मौसम नजारा है।

                  4 step

 वहीं पर राजू की नजर राजकुमारी पड़ जाती है तो वह मंत्रमुग्ध हो जाता है क्योंकि राजकुमारी थी रेशमी बाल थे सुंदर शुशील थी। राजकुमारी भी राजू को देखी। कुछ समय बाद एक दूसरे का पहचान हो गई कुछ दिनों में अच्छे दोस्त बन गए।इधर राजू के पापा को उसके उपर पहाड़ टूट पड़ी थी वहां हमेशा चिंता हरा शिवम अपने पुत्र को खोजने के लिए सभी जगह हर तरह के प्रयास करते एक दिन उसके मन में ख्याल आया कि क्यों ना उसके दोस्तों से के माता पिता के पास जाकर पूछ लिया जाए तो वह वहां गए तो पता चला कि पिकनिक में गए फिर वापिस नहीं आए। 

 फिर नारायण जंगल जाने के लिए जरा सा भी देर नहीं किए उसी रास्ता में जाते जाते राजा के महल पहुंच गए तो गांव वालों से पता चला कि यहां पर कुछ लड़के कुछ ही दिनों में आए हैं। जो चोरी के नाम से पकड़ा गए हैं।

                      5step

रामनारायण राजा के पास सिपाहियों के साथ गए । राजू वहीं पर साफ - सफाई का काम कर रहा था। वह अपने पिता को देख तुरंत उसको पहचान लिया और उसके पास जाकर पूरी अपनी कहानी बताई। तो राजा ने कहा कि चलो इस पर हम एक बार फिर से विचार करते हैं तो देखा कि वहां जाकर उसी  जंगल में जिस जगह रामू डाकुओं को देखा था जहां डाकू खजाने को बांट रहे थे वहीं पर छानबीन करने पर उसे जो खाजाना जो आम के वृक्ष के नीचे दबाए हुए थे वह मिल गया । और राजू को रिहा कर दिया। और यह बिना गलती के जो उसको सजा मिली थी उसके बदले में राजू को कुछ मांगने के लिए कहा। तो राजू ने झिझकते दिल से तुरंत उसकी राजकुमारी की हाथ मांग ली। राजा पहले सोचा मगर रामू की आदत को इतना दिन में उसे पूरी तरह से समझ लिया था। तो फिर क्या था।

पैसों का महत्व

  राजकुमारी और राजू का धूमधाम से विवाह कर दिया गया।

 फिर राजू अपने शहर में वापस आ गया ।तथा अपने पिता का भी महत्व समझ गया, कि मेरे पिता मेरे लिए अपनी जिंदगी मेहनत करके मेरा पालन - पोषण किया है। और धूमधाम से अपनी जिंदगी का जीवन यापन करने लगा।

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