Sayari

बहारों के मौसम में रंग बिरंगे फूल खिले,
भौंरो ने कहा तितलियों से ,
अब तो हम बहुत दिन के बाद मिले।

सावन में हरियाली भरे लगता हैं,
धरती हरा रंग की साड़ी पहने।
यही तो है हरियाली की वातावरण
धरती मां की गहने।

इस बरसात में बूंद-बूंद में बस तेरी आवाज़ आती है।
इस बादल की कड़कड़-आहट में तेरे चांद सा चेहरा मुस्कुराती है।

नयी सुबह नयी शाम है ,
अब कुछ काम में मन नहीं लगता ,
अब बस आपका नाम है।

चांद से चेहरे को ,यूं न छिपाया करो,
तेरी एक मुस्कान है ,मोतियों की जड़ों।

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