कविता - चमकता सूर्य का किरण

चमकता सूर्य का किरण

सुबह के गोल लालिमा में चमकता सूर्य का किरण।

 भोरें गुनगुनाने लग जाते हैं,
 पक्षियों गगन में उड़ जाते हैं।

वनों में गमन करने लगते हैं हिरण,
 चमकता सूर्य का किरण।

सुबह के गोल लालिमा में
चमकता सूर्य का किरण।

 सूरज हमसे भेदभाव नहीं करता,
 एकता का पाठ पढ़ाता है।

 चुपके से हमें जगाता,
फिर शाम ढले खुद सो जाता।

इसके प्रकाश में पेड़ - पौधे फूलों का खुशबू महकता ।जीव -जंतु व मनुष्य का चेहरा दमकता।

यह खिले तो दुनिया खिले,
ये सोए तो हम भी सोए ।

सूरज हम इंसानियत का पाठ पढ़ाता।
सबको परोपकार करने का सिख सिखाता।

 ये हमें कुछ भी मुश्किल आ जाए ,
हंसते रहने का देते है संदेश जिसे
 कहते है सूर्य के किरण का उपदेश।🌹🌹🙏

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