LOVE LIFE

 प्रेम वर्णन

LOVE LIFE



नि: स्वार्थ भाव से एक दूसरे के प्रति समर्पित होना ही प्रेम की मूल प्रति परिभाषा है।

जैसे - राधा ने कृष्ण को किया था ।

प्रेम किसी को पाना नहीं होता बल्कि उसके खुशी में अपनी खुशी समझता है। प्रेम त्याग का भी एक स्वरूप है जिसमें अपनी इच्छाओं को त्याग कर अपनी प्रेम के इच्छाओं को पूरी करनी की कोशिश करता है।


difference between friend and love

दोस्त - दोस्त ओ है जो आपके दुख सुख को साझा करें । अगर आप रास्ता भटक गए है तो उसे सही मार्ग दिखाए । दोस्त दिखावा करने वाला नहीं होता जो आपको चाही ओ अगर उसके पास है तो बिना बताए आपके प्रॉब्लम सॉल्व कर देता है।दोस्ती में मजाक छोटी छोटी बातें में नोक झोंक रूठना मनाना ये सब कॉमन बात है।

हर एक दोस्त के गुण सुदामा की तरह होनी चाहिए जो बिना लालच के अपनी दोस्ती भी निभाई और भक्ति की परीक्षा से कीमत भी चुकाई।

दोस्तों में झूठ बोलना फिर उसको बाद में सुधारना ये सब होता रहता है अर्थात् एक दोस्त दूसरे दोस्त को हंसाता भी है और मस्ती भरी नज़रों से रुलाता भी है।

दोस्त के कोई रूप नहीं होती दोस्ती सबसे की जाती है। और उसे निभाकर दोस्ती की गहराई हमेशा के लिए बनी रहती है कच्ची दोस्ती कभी भी टूट जाती है लेकिन पक्की वाली दोस्ती हमेशा के लिए रहती है।


forms of love

प्रेम - प्रेम के कई रूप होते है।माता - पिता, भाई - बहन , दीदी -जीजा , मामा - मामी आदि।

लेकिन इन सबसे अलग एक और प्रेम होती है जिसे प्रेमी - प्रेमिका कहते है।

तो अब हम इसी के बारे में चर्चा करने वाले है -

की प्रेम क्या होती है ?

प्यार करना और प्रेम करना इसमें बहुत बड़ा अंतर है-

जैसे कि प्यार किसी के साथ Attraction से भी हो सकती है।

किसी के दबाव से भी हो सकती है।

अगर पति पत्नी बने तो जीवन व्यतीत करने के लिए एक दूसरे को जान समझकर भी हो सकती है ।

To love -

प्रेम करना - कोई आपको नहीं जानते हो और आप उसको तो एक दूसरे के नयना में झांककर अपनी परछाई उसमे पाते हो तो इसे प्रेम कहां जाता है ।यह एक दूसरे को देख मंत्र मुग्ध हो जाना ।

अपनी काम दिनचर्या को भूल जाना और अपनी प्रेमी के ही चित्त में खोए रहना प्रेम की झलक है। प्रेम में कोई भेदभाव नहीं होती वह तो अटूट अपार होती है।प्रेम की कोई रंग रूप नहीं होती न ही उसकी कोई आकार होती है यह निराकार प्रेम ऐसी है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के प्रति राधा रानी की प्रेम अमर है। इसकी आज भी कोई इसकी मुल जड़ को नहीं पाया। क्योंकि प्रेम आखिर भगवान का ही दूसरा रूप है। जिसे समझ पाना आम इंसान की हाथ में नहीं है ।


प्यार किससे करनी चाहिए?

who should love


जो हमारी मनोभाव को समझता हो। हमारे दुख सुख को अपना मान हमारी केयर करती हो। 

 और हमारी हर इच्छाओं का ध्यान रखती हो ।

 वह निस्वार्थ भाव से हमें मन ही मन चाहते हो।

जो अपने मन में जीवनसाथी बनाने की तमन्ना रखता हो।

हमारी बातों को आसानी से समझ लें

फ्यूचर planning बनाता हो की मै उसको ऐसे रखूंगा वैसे रखूंगा अर्थात् वह सारी खुशियों को समेटता हो। कि उसे आगे चलकर कोई भी प्रॉब्लम आए तो भी साथ नहीं छोडूंगा।

लड़कियां भी ये सोचती है कि मै अपने प्यार का ख्याल अच्छे से रखूंगी किसी भी मुसीबत में उसका साथ निभाऊंगी तो इससे है प्यार करना कहते है इसे खोना नहीं चाहिए क्या पता आगे चलकर किसी गलत इंसान के पाले न पड़ जाए😂



अच्छे प्यार की क्वालिटी क्या होती है?

what are the qualities of good love


1 वह अपनी प्यार से कभी झूठ नहीं बोलेगा।

2 अपनी मन की बातों को साझा करेगा।

3 अपनी गम को छुपा आपको प्यार का एहसास करायेगा।

4 आपकी निंदा करते किसी को देखेगा तो वह चुप नहीं बैठेगा ।

5 future planning करेगा।

6 आपसे नज़रे कभी नहीं चुराएगा नजर मिलाके बात करेगा।

7 आपके ऊपर कभी शक नहीं करेगा।क्योंकि प्यार में विश्वास भरोसा होती है शक नहीं।

8 आपको आगे बढ़ने में प्रेरित करेगा।

9 अपने फैमिली से मिलाएगा।क्योंकि जो झूठे होते है ओ अपनी फैमिली से कभी नहीं बात कराते।

10 अपने आने - जाने, खाने - पीने, घूमने - फिरने

यहां तक कि अपनी अच्छी और बुरी बात सब बताएगा।

11अपने यादों की संयोग कर रखेगा।

12 आपकी बातों को कभी बुरा नहीं मानेगा।

अगर गलती हो भी जाएं तो उसे सुधारने का प्रयास करेगा।

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