छत्तीसगढ़ी - कविता

हमर परिवार बर कस बगरे डाल,जेकर हावय मूल जरी सियानी अवस्था ते कर होत हे बुरा  हाल।
मुंह माया म एक दूसर के बंधे रथे ।
हमर घर के सियानिन के मया सबो बर लगे रथे।
बोलथे पांच अगंठी हे पांचों बर पीरा हे।
अपन नाती नतनिन ल देखे बर तरसथे , बहथे आंखी के नीरा हे।
महतारी मन नांकुन ले पाल पोष के बड़े कर्थे ।
सियानी हालत हॉथे त ओ ई दाई ददा मन लईका के गुरतुर बोली सुने बर तरस्थे।
लइका ह सियानी के गोठ म खिसिया जाथे ।
अपन जहुरिया ल खोजे बर Facebook फोन म गोथियाथे।
वाह रे जमाना सियानिन सियान करा गोठियाय म मुंह पिराथे।
संगी साथी करा गपियाए म दिन रात पहाथे।

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कविता - आज अपन भगवान ल भुला गएन

आज अपन भगवान ल भुला गएन रे।
खोखरा तन के सुघराई म लुभा गएन रे।
अपन भगवान ल वादा करके आए रहेन ।
धर्म नीति के ज्ञान धरबो अपन वचन ल गवाए रहेन।
आज जीनगी विरथा परान होगे रे,
आज अपन भगवान ल भुला गएन रे।
खोज दारेन भगवान ल मस्जिद मन्दिर तीर्थधाम।
एती वोती भटकत हे ए जीव ह नई डराइस छाव घाम।
आज अपन अंतस के भगवान ल न खोज पायेन रे ,
आज अपन भगवान ल भुला गएन रे।
मुंह माया के जाल म फंस गईच तन के चिराईया।
दाई  ददा बनगे लईका सियान बगर गए अमरईया।
आज अपन जीनगी ल रोवा गएन रे।
आज अपन भगवान ल भुला गएन रे ।
अढ़ही अढ़हा बन गएन रेन्गत हन अंधियारी बेरा।
सबों ल जाए ल पड़ही एक दिन यम के डेरा।
आज अपन सोच म गरभ अभिमान बन गएन रे,
आज अपन भगवान ल भुला गएन रे।
 निंदा चारी चुगली म अपन जीनगी ल पहा डारेन।
सही रस्ता के चिन्हारू नई मिलिस अपन नियत ल डोला पारेन।
आज सगरी उमर ल पहा पारेन रे,
आज अपन भगवान ल भुला गएन रे ।
खोखरा तन के सुघाराई म लुभा पारेन रे।
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