कविता - त्रिकालदर्शी महादेव (महाशिवरात्रि)

त्रिकालदर्शी महादेव

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं🙏

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 जय शिव शंकर कैलाश में डमरू बजाएं।

अंग भभूत भांग की धुंध रमाएं।


त्रिकालदर्शी महादेव


आदि शक्ति त्रिकालदर्शी देवों का महादेव कहलाएं।

मस्तक में चंदा जटा धारी गंगा झर झर बहाएं।


नीलकंठ धारी करुणा त्रिपुरारी।

गले में सर्प की माला दयालु कष्टहारी।

त्रिदेवों में से एक विधाता।

अन्नत कोटि के शंभू कोई न समझ पाता।


अनेक नाम महाकालेश्वर नीलकंठाय शंकरा,

शिव शंभू रामेश्वर त्रिनेत्र कहलाते रविशंकरा।


जिस नाम से भक्त बुलाते।

भोले दयालु रम जाते।

उमापति उमा माता करते पूजा। 

सुनते पुकार तुझ जैसा न कोई दूजा।


भूत -प्रेत बाराती आए।

ऐसी अनोखी थी वरमाला

ऐसी वेश पहने बाघ की छाला


महाशिवरात्रि के दिन आए

करो हम पर कृपा

हे कृपालु दीन दयालु महादेव शिवा।






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